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चलता है मुंबई में अनोखा रेस्टोरेंट, जहां कुत्ते करते हैं रोज पार्टी




फाइल फोटो: पेफे रेस्तरां

मुंबई। बर्थडे पार्टी, सक्सेस पार्टी, मैरिज पार्टी, ब्रेकअप पार्टी के बारे में तो आप अक्सर सुनते हैं, लेकिन क्या कभी कुत्ता पार्टी के बारे में सुना है? जी हां, कुत्ता पार्टी।
मुंबई के अंधेरी में स्थित पेट्स इमोसंस फूड ऐंड एवरीथिंग (पेफे) रेस्तरां के मेहमान कुत्ते होते हैं। यहां न केवल इनके लिए खास तरह के पकवान बनाए जाते हैं,
बल्कि दूसरे कुत्तों के साथ समय बिताने और खेलने का भी मौका मिलता है। करानी होती है अडवांस बुकिंग,
यह रेस्तरां कुत्तों को ध्यान में ही रखकर बनाया गया है। खाने के लिए लगे टेबल से लेकर बैठने के लिए कुर्सी तक में कुत्तों को आकर्षित करने वाली चीजों को शामिल किया गया है। यही नहीं, कुत्तों को उनके मालिकों के साथ बैठकर खाने के लिए विशेष कुर्सियां लगाई गई हैं। रेस्तरां चलाने वालों का कहना है कि यहां रोजाना तकरीबन 100 कुत्ते आते हैं, जबकि वीकेंड पर बढ़ती भीड़ को देखते हुए अडवांस बुकिंग करानी होती है।
एक छत के नीचे सब कुछ
चाहे कुत्तों को लजीज खाना खिलाना हो या उनका मन बहलाना पेफे कुत्ता मालिकों के लिए अच्छा विकल्प बन रहा है। उनके पालतू जानवरों की बर्थडे पार्टी के लिए भी यहां विशेष व्यवस्था है। रेस्तरां शुरू करने वाले 'ओह माई डॉग' के दीपेन शर्मा ने बताया कि यहां आने वाले लोग अक्सर अपने कुत्तों का जन्मदिन मनाने के लिए आते हैं। मुंबई के अलावा, यहां नासिक, पुणे और अहमदाबाद तक से लोग आते हैं।
पेफे रेस्तरां,
'रिसोटो' की सबसे अधिक मांग,
दीपेन शर्मा ने बताया, 'यह कुत्तों के लिए विशेष रेस्तरां है, इसलिए हम उनकी सेहत का भी खयाल रखते हैं। इसे शुरू करने से पहले हमने खाने की चीजों को लेकर काफी शोध किया। यहां मिलने वाली सभी डिशेज हमने खुद तैयार की हैं। रेस्तरां आने वाले कुत्तों को सबसे अधिक रिसोटो नाम की डिश पसंद है। यह एक मैक्सिकन डिश है। हमारी संस्था जानवरों के लिए काम करती है, इसलिए हम किसी जानवर को नुकसान न पहुंचाते हुए कुत्तों के लिए सिर्फ शाकाहारी डिश ही बनाते हैं।' बता दें कि यहां कुत्तों के अलावा इंसानों का भी खाना मिलता है, लेकिन प्राथमिकता कुत्ते हैं।
इन्हें भी है प्यार की जरूरत
'ओह माई डॉग' के संस्थापक संकल्प शर्मा ने बताया कि जानवरों, खासकर कुत्तों को भी प्यार की जरूरत होती है। इस रेस्तरां को शुरू करने का एक उद्देश्य यह भी है कि कुत्तों को कुछ समय के लिए घर के वातावरण से दूर लाया जाए। इससे उन्हें अच्छा महसूस होने के अलावा दूसरे कुत्तों के साथ खेलने का भी मौका मिलता है।' परेल स्थित जानवरों के अस्पताल के प्रमुख डॉ. जे.सी. खन्ना ने बताया कि यह बहुत अच्छी पहल है। एक ही जगह कुत्तों को रखने से उनमें अवसाद के अलावा गुस्सा आ जाता है, जिससे उनमें काटने की प्रवृत्ति बढ़ जाती है।

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